Hydrocele Causes, Symptoms And Treatment in Hindi- AR Ayurveda

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जानिए पुरुष में होने वाली बीमारी हाइड्रोसील के कारण, लक्षण और इलाज!

Posted on Feb 19, 2021
जानिए पुरुष में होने वाली बीमारी हाइड्रोसील के कारण, लक्षण और इलाज!
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हाइड्रोसील के लक्षण, प्रकार और उपचार (Symptoms, Type and Treatment Of Hydrocele in Hindi)

अंडकोष पुरुष शरीर का सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण अंग होता है, इसे टेस्टिस, या टेस्टिकल के नाम से भी जाना जाता है। इस अंग के द्वारा ही पुरुष, पुरुष कहाने के योग्य बनता है, क्योकि टेस्टिस या अंडकोष में ही पुरुष सेक्सुअल हॉर्मोन्स टेस्टोस्टेरॉन का निर्माण होता है जिससे सेक्स क्रिया संचालित होती है (Testosterone hormone for sexual performance). टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन के द्वारा ही पुरुष के मुँह पे बाल यानि दाढ़ी-मुछ आती है तथा आवाज में बदलाव भी इसी हॉर्मोन के द्वारा होता है। इसलिए इसमें होने वाली किसी भी समस्या को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। अधिकांश पुरुष अंडकोष के दर्द तथा सूजन को हल्के में ले लेते है, और साधारण दर्द की दवा का सेवन करते है। उन्हें ज्ञात नहीं होता कि अगर बात ज्यादा गंभीर हो जाये तो पुरुष बाँझपन का भी खतरा हो सकता है। कई बार यह दर्द हाइड्रोसील के कारण भी हो सकता है। इसलिए पुरुष को हाइड्रोसील (Hydrocele problem in male) की समस्या को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

हाइड्रोसील क्या है (What Is Hydrocele In Hindi):-

हाइड्रोसील पुरुषों के अंडकोष में होने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें टेस्टिकल के आसपास फ्लूइड यानी पानी एकत्रित होने लगता है। हाइड्रोसील होने से भी अंडकोष में तेज दर्द और सूजन शुरू हो जाता है। जब टेस्टिकल में पानी भर जाता है, तो अंडकोष का आकार भी बढ़ जाता है। यह समस्या पुरुषों में किसी भी उम्र में हो सकती है। हाइड्रोसील बच्चों में बहुत आम है क्योंकि साइकिलिंग, क्रिकेट, तथा अन्य खेलकूद के समय अंडकोष पर चोट लग जाती है, जिसके बाद यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। वैसे तो समय पर इसका इलाज दवा के इस्तेमाल से भी संभव है पर कई बार ऑपरेशन भी करना पड़ जाता है। अगर समय से इस समस्या का उपचार न कराया जाय तो यह घातक भी साबित हो सकता है। क्योंकि जब अंडकोष में पानी अधिक भर जाता है, तो अंडकोष फट भी सकता है।

हाइड्रोसील के कारण (Causes Of Hydrocele In Hindi):-

अंडकोष में हाइड्रोसील की समस्या कई वजह से हो सकती है तो आइये जानते हैं हाइड्रोसील की समस्या के कारण-

  • ज्यादातर बच्चो में से समस्या जन्म से ही होती है। 
  • आनुवांशिक समस्या या कोई विकार
  • सूजन और चोट लगने के कारण
  • इनगुइनल हर्निया के कारण हाइड्रोसील होना
  • अंडकोष के आस-पास अधिक मात्रा में लिक्विड बनना
  • टेस्टिकल में किसी भी तरह का इंफेक्शन होना

हाइड्रोसील के प्रकार (Types Of Hydroceles In Hindi):-

हाइड्रोसील की समस्या मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं, जिन्हे नॉनकम्यूनिकेटिंग और कम्यूनिकेटिंग के रूप में जाना जाता है। 
नॉनकम्यूनिकेटिंग:- नॉनकम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील तब होता है, जब थैली बंद हो जाती है, लेकिन आपका शरीर फ्लूइड को एब्जॉर्ब नहीं करता है।
कम्यूनिकेटिंग:- कम्यूनिकेटिंग हाइड्रोसील तब होता है, जब टेस्टिकल के आसपास थैली बंद नहीं होती है। इससे तरल पदार्थ अंदर-बाहर आता-जाता रहता है।

हाइड्रोसील के लक्षण क्या होते हैं (Symptoms Of Hydrocele In Hindi):-

  • यौन संभोग के दौरान दर्द होना
  • अंडकोष में सूजन, जिसमें दर्द ना होना।
  • सूजन के साथ दर्द का अनुभव 
  • अंडकोष के आकार में वृद्धि होना।
  • टेस्टिस का भारी महसूस होना। 

हाइड्रोसील का इलाज (Treatment of Hydrocele in Hindi):-

वैसे तो सामान्य अवस्था में इस समस्या को डॉक्टर से संपर्क करने पर दवाइयों के माध्यम से भी हल किया जा सकता है, इसके अलावा हाइड्रोसील को ठीक करने के लिए सर्जरी एक सरल प्रक्रिया है।

बच्चो में (For Childs):- 

कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील को ठीक करने के लिए सर्जरी एक सरल प्रक्रिया है। इस सर्जरी में एक छोटा सा कट लगाकर अंडकोष में जमे तरल को बाहर कर दिया जाता है, और फिर इस छेद को बंद कर दिया जाता है। बच्चों में कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील का मामला ज्यादातर हर्निया से जुड़ा हुआ होता है। अगर हर्निया हो तो उसे भी सर्जरी के समय ठीक कर दिया जाता है।

वयस्कों में (For Adults):-

ऑपरेशन द्वारा - एक छोटा सा कट लगाकर तरल पदार्थ को निकाल दिया जाता है और इस कट को बंद करके इस समस्या को ठीक किया जाता है। हाइड्रोसील की सर्जरी लगभग हमेशा ही इस समस्या को ठीक करने में कामयाब रहती है।

अधिकांश मामलों में हाइड्रोसील शीघ्र ठीक हो जाती है। अधिकतर लोग इस सर्जरी के कुछ ही घंटों के बाद घर जा सकते हैं। लेकिन, इस सर्जरी के बाद बच्चों को अपनी हर रोज की गतिविधियों को सीमित करना चाहिए और पहले कुछ दिनों में अतिरिक्त आराम करना चाहिए। सर्जरी के बाद ज्यादातर मामलों में रोगी 4 से 7 दिनों के बाद अपनी सामान्य जिंदगी फिर से शुरू कर सकता है।

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